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अलंकार

अलंकार

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वह स्वर जो नियम के अनुसार एक क्रम में बढ़ते चलते है उन्हें अलंकार कहते है

अलंकार कड़ियों में बटे होते है जो आपस में जुड़ी होती है 

 

प्रत्येक अलंकार में आरोह मध्य स से लेकर तार सप्तक के स तक होता है

उसी प्रकार अवरोह तार स से लेकर मध्य सप्तक के स तक होता है

सरल भाषा में कहे तो संगीत में स्वरों की बनी जिन कड़ियों को हम सरगम कहते है वे अलंकार कहलाती है

यह कुछ अलंकारों के उदाहरण है 

आरोह- स रे ग म प ध नि स

अवरोह- स नि ध प म ग रे स 

आरोह-  सा सा, रे रे, गा गा, मा मा, पा पा, धा धा, नि नि, सां सां

अवरोह – सां सां, नि नि, धा धा, पा पा,मा मा, गा गा, रे रे, सा सा

आरोह – सा रे गा, रे गा मा, गा मा पा, मा पा धा, पा धा नि, धा नि सां

अवरोह – सां नि धा, नि धा पा, धा पा मा, पा मा गा, मा गा रे, गा रे सा

 

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इस प्रकार स्वरों से अनेको अलंकारों की रचना की जा सकती है 

 

अलंकारों को पलटा व् सरगम भी कहा जाता है

अलंकारों का अभ्यास विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक होता है

स्वर ज्ञान समझने के लिए अलंकारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है

ताल में आने का पहला माध्यम अलंकार ही है

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