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राग लक्षण

राग लक्षण

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पौराणिक कल में राग के दस लक्षण माने जाते थे इनके नाम इस प्रकार है –

ग्रह 

अंश 

न्यास 

अपन्यास

षाडवत्व

ओडवत्व

अल्पत्व 

बहुत्व

मन्द्र 

तार

 

इन लक्षणों मेसे आज इनके कुछ परिवर्तित रूप उपयोग किये जाते है आधुनिक समय में राग के लक्षण निम्न है 

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स्वरों की वह रचना जो कानो को मधुर लगे राग कहलाती है अर्थात हर राग में रंजकता होनी आवश्यक है 

राग में कम से कम पांच व् अधिक से अधिक सात स्वर होने चाहिए 

प्रत्येक राग किसी थाट का होना आवश्यक है 

किसी भी राग में सा वर्जित नहीं होगा क्योकि यह सप्तक का आधार स्वर है 

प्रत्येक राग में म या प मेसे एक स्वर का होना आवश्यक है दोनों एक साथ वर्जित नहीं किये जा सकते

प्रत्येक राग में आरोह-अवरोह वादी-सम्वादी पकड़ समय होना आवश्यक है 

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